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325 बिछड़ों के लिये फरिश्ता बने ये ASI, जानें…

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Delhi : कभी-कभी जिंदगी किसी को ऐसा मोड़ दिखा देती है, जहां दर्द ही इंसान को रास्ता दिखा देता है। दिल्ली पुलिस के ASI अजय झा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां वर्दी से पहले दिल ने ड्यूटी संभाली। अजय झा की प्रेरणा उनका अपना बेटा है, जो स्पेशली एबल्ड है। दो बार बेटा खोया और दो बार उसे ढूंढने के लिये पिता दिन-रात भटकता रहा। उसी तलाश में उन्होंने देखा शेल्टर होम में पड़े वो चेहरे, जिनकी आंखें अपने घर का रास्ता पूछती थीं, लेकिन जुबान साथ नहीं देती थी। यहीं अजय झा ने ठान लिया, “अगर मेरा बच्चा मिल सकता है, तो हर बिछड़ा अपनों से मिलेगा।” गुजरे दो सालों में 325 बच्चे और बुजुर्ग, जो बोल नहीं सकते थे, सुन नहीं सकते थे या मानसिक रूप से असहाय थे, अजय झा की मेहनत से अपने घर लौटे। कभी रेलवे स्टेशन से, कभी सड़कों से, कभी शेल्टर होम से, उन्होंने हर बिछड़े को परिवार से जोड़ा। इंटरनेट और सोशल मीडिया, स्थानीय पुलिस और मुखिया का सहयोग, फोटो वायरल कर पहचान, हर केस में अजय झा ने उम्मीद को हथियार बनाया।

उनका पहला केस आज भी यादगार है, तीन महीने से शेल्टर होम में रह रहा मूक-बधिर बच्चा जय प्रकाश, जिसे उन्होंने रेलवे स्टेशन से पहचान कर गुरुग्राम में माता-पिता की गोद तक पहुंचाया। फिर आये ऐसे-ऐसे मामले, 5 साल से शेल्टर होम में किशोर, 13 साल का मानसिक रूप से कमजोर बच्चा, जो एमपी पहुंच गया था, 6 साल बाद पिता-पुत्र का मिलन, जहां आंखों से आंसू नहीं, दुआएं बह रही थीं। अजय झा बस इतना कहते हैं कि “जब नेक काम करते हैं, तो ईश्वर खुद रास्ता बना देता है।”

अब तक कई बिछड़ों को अपनों से मिला चुके हैं एएसआई अजय झा

खुद सड़कों पर निकलकर परिवार से बिछड़े लोगों के लिए प्रयास करते हैं अजय झा

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