Bihar : त्योहारों का मौसम आते ही घर लौटने की बेचैनी बढ़ जाती है। कोई मां के हाथ का खाना खाने को बेताब है, तो कोई बरसों बाद छठ के घाट पर परिवार के साथ खड़ा होना चाहता है। लेकिन इस बार घर पहुंचने की राह में एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है, हवाई टिकटों की आसमान छूती कीमत। दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पूजा करीब आते ही देश के प्रमुख हवाई मार्गों पर किराया तेजी से बढ़ गया है। बुकिंग पोर्टल्स और एविएशन ट्रेंड्स के हवाले से मीडिया में आई खबर के मुताबिक, कई रूट्स पर टिकट सामान्य दिनों की तुलना में डेढ़ से साढ़े तीन गुना तक महंगे हो गये हैं। इसका सीधा असर उन कामकाजी और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है, जो त्योहार में घर लौटने के लिये पहले से टिकट की तैयारी कर रहे हैं। दिल्ली से पटना का टिकट सामान्य दिनों में करीब 4,500 रुपये में मिल जाता है। लेकिन दुर्गा पूजा के दौरान इसकी शुरुआती कीमत करीब 6,000 रुपये पहुंच गई है। छठ के दौरान यही किराया करीब 10,000 रुपये बताया जा रहा है। वहीं, दिवाली से ठीक एक दिन पहले 7 नवंबर को शुरुआती किराया 14,000 रुपये तक पहुंच गया है। दिल्ली-दरभंगा रूट पर सीमित उड़ानों के कारण किराये में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। दुर्गा पूजा के दौरान टिकट की शुरुआती कीमत करीब 6,500 रुपये, जबकि छठ पूजा यानी 11 नवंबर को करीब 12,000 रुपये तक पहुंच गई है। दिवाली के दिन 7 नवंबर को यही किराया 17,000 रुपये तक बताया जा रहा है। दिल्ली से कोलकाता के हवाई सफर पर भी त्योहार का असर साफ दिखाई दे रहा है। दुर्गा पूजा के दौरान शुरुआती किराया करीब 8,000 रुपये, दिवाली पर 11,000 रुपये और छठ के दौरान करीब 7,500 रुपये बताया जा रहा है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं हवाई किराये?
जानकारों के मुताबिक, किराये में इस तेजी के पीछे कई कारण हैं। पहला, ATF की कीमत। एयर टरबाइन फ्यूल के दाम में 5.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। विमान कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई होती है। दूसरा, सीमित प्रतिस्पर्धा। घरेलू विमानन बाजार में बड़े एयरलाइन समूहों का दबदबा है। सीमित उड़ानों वाले रूट पर यात्रियों के पास विकल्प कम बचते हैं, जिसका असर टिकट की कीमत पर दिखाई देता है। तीसरा, उड़ानों की क्षमता में कमी। एविएशन डेटा एजेंसी OAG के अनुसार, त्योहारों में मांग बढ़ने के बावजूद घरेलू उड़ानों की कुल क्षमता में करीब 5.6 प्रतिशत की गिरावट आई है। चौथा, डायनेमिक प्राइसिंग। एयरलाइंस मांग और बुकिंग की रफ्तार के हिसाब से किराया बदलती हैं। जैसे-जैसे सीटें कम होती जाती हैं और बुकिंग बढ़ती है, टिकट की कीमत तेजी से ऊपर जा सकती है।
जेब बचानी है तो ये रास्ते आजमायें
त्योहार में घर जाने की योजना बना रहे यात्रियों के लिये विशेषज्ञ कुछ सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं।
- तारीख में थोड़ा बदलाव करेंः त्योहार के आसपास की तारीखों में किराये की तुलना करें।
- सुबह बहुत जल्दी या देर रात की उड़ान देखेंः नॉन-पीक समय की उड़ानें कई बार अपेक्षाकृत सस्ती मिल सकती हैं।
- नजदीकी वैकल्पिक एयरपोर्ट देखेंः गंतव्य के आसपास के दूसरे हवाई अड्डों से आने-जाने का विकल्प भी जांचें।
- किराये की तुलना करके ही टिकट बुक करेंः अलग-अलग तारीख और समय पर कीमतों में बड़ा अंतर हो सकता है।






