KohramLive : भले एल्कोहल नुकसानदेह हो, पर पीने वालों की कमी नहीं। हाल ही में एक बात सामने आई है कि शराब पीने के शौकीन सौ लोगों में से 70 को बीयर पीना पसंद होता है। पर, किसी ने शायद ही नोटिस किया हो कि बोतल हमेशा हरे (Green) या भूरे (Brown) रंग की होती है। इसके पीछे की वजह सामने उभरकर आई है। बीयर की बोतल हरे (Green) या भूरे (Brown) रंग के होने के पीछे ख़ास कारण है। कई साल पहले बीयर की बोतलें इजिप्ट में बनाई जाती थी। बीयर को ट्रांसपेरेंट बोतलों में बना कर सर्व किया जाता था। बीयर बनाने वाली कंपनियों ने नोटिस किया कि जब इन ट्रांसपेरेंट बोतलों में सूरज की रोशनी पड़ती थी, तब अंदर भरा एसिड रोशनी में मौजूद अल्ट्रा वायलेट रेज की वजह से तेजी से रियेक्ट करता था। इसकी वजह से बीयर पीने से कई तरह के नुकसान होने लगे, नतीजा इससे दूरी बनानी शुरू कर दी। इस वजह से कंपनियों को बहुत नुकसान होने लगा।
नुकसान की भरपाई के लिये कंपनियों ने नया जुगाड़ निकाला, पर कोई खास फायदा नहीं हुआ। तब ऐसे में बोतलों पर भूरे रंग की कोटोंग चढ़ानी शुरू कर दी। यह उपाय काम कर गया। भूरे रंग की बोतलों में रखा बीयर खराब नहीं होता था। इस वजह से सूरज की रोशनी बोतल में बंद लिक्विड तक नहीं पहुंच पाती थी। लेकिन कुछ ही समय बाद जब सेकंड वर्ल्ड वॉर हुआ, तब Beer कंपनियों के सामने एक और परेशानी आ गई। उस समय भूरे रंग की बोतलों का अकाल पड़ गया। इस रंग की बोतलें मिलनी बंद हो गई। ऐसे में फिर नए रंग की बोतल बनानी पड़ी। सूरज की रोशनी भूरे के अलावा हरे रंग को बीयर तक नहीं पहुंचने देती। ऐसे में इसे ही चुना गया। तब से लेकर अब तक बीयर की बोतल हरे और भूरे रंग में ही अवेलेबल है।
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