बिहार में 288 खातों में पहुंची 150 करोड़ की संदिग्ध विदेशी फंडिंग…

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Bihar : बिहार में कथित संदिग्ध विदेशी फंडिंग का एक बड़ा मामला जांच एजेंसियों के रडार पर है। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से बिहार के 288 लोगों के खातों में करीब 150 करोड़ रुपये की संदिग्ध रकम पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इनपुट मिलने के बाद आयकर विभाग ने संबंधित लोगों के बैंक खातों, आय के स्रोत, वित्तीय लेन-देन और चल-अचल संपत्तियों की पड़ताल शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में 119 लोगों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा चुके हैं। अधिकारियों को इनमें कुछ खातों में असामान्य और बड़े लेन-देन के संकेत मिले हैं। सबसे अहम पहलू यह है कि जांच के दायरे में आये 288 लोगों में बड़ी संख्या उन जिलों से बताई जा रही है, जो भारत-नेपाल सीमा के आसपास स्थित हैं। जांच में सामने आये शुरुआती पैटर्न ने एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि किसी एक खाते में बड़ी रकम भेजने के बजाय कई लोगों के बैंक खातों में छोटी-छोटी रकम ट्रांसफर की गई। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस तरीके का इस्तेमाल वित्तीय निगरानी से बचने के लिये किया गया हो सकता है। आयकर विभाग अब संबंधित लोगों के बैंकिंग रिकॉर्ड के साथ उनके पिछले वर्षों के आयकर रिटर्न, घोषित आय और खातों में पहुंची रकम का मिलान कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में गृह मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय बैठक में बिहार से जुड़े इस इनपुट और वित्तीय आंकड़ों पर चर्चा हुई। बैठक में बिहार के आला अधिकारियों की मौजूदगी में मामले से संबंधित जानकारी साझा किये जाने की बात सामने आई है।

खुफिया एजेंसियां अलर्ट, नेपाल सीमा पर खास नजर

सितंबर के अंतिम सप्ताह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों और आयकर विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की थी। बैठक में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में अवैध गतिविधियों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन को लेकर चर्चा हुई। गृह विभाग की ओर से भी संबंधित जांच एजेंसियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिये जाने की जानकारी है। नेपाल सीमा से लगे इलाकों में वित्तीय गतिविधियों पर पहले से ही सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नजर रहती है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण सीमावर्ती इलाकों में लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत आसान है। जांच एजेंसियां लंबे समय से इन क्षेत्रों में अवैध वित्तीय लेन-देन, हवाला और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े मामलों पर नजर रखती रही हैं। हालांकि, मौजूदा मामले में विदेशी रकम का किसी गैरकानूनी गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसी वजह से एजेंसियां फिलहाल बैंकिंग रिकॉर्ड और पैसों के वास्तविक स्रोत को सबसे अहम कड़ी मानकर आगे बढ़ रही हैं।

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