जेल की सलाखों के बीच अधिकारों की बात…

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Garhwa(Nityanand Dubey) : जेल की ऊंची दीवारों के भीतर भी कानून का दरवाजा हर किसी के लिये खुला है। इसी संदेश के साथ गढ़वा मंडल कारा में शुक्रवार को जेल अदालत सह स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। शिविर में बड़ी संख्या में बंदियों ने हिस्सा लिया और उन्हें उनके कानूनी अधिकारों, कर्तव्यों और स्वास्थ्य को लेकर जागरूक किया गया। यह कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देश और प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार गढ़वा दिनेश कुमार के निर्देश पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने बंदियों को उनके कानूनी हक, अधिकार और कर्तव्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्येक व्यक्ति को अपने मामले की पैरवी के लिये अधिवक्ता रखने का अधिकार है।

पैसे की कमी न्याय के रास्ते में बाधा नहीं

बंदियों को बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है और निजी अधिवक्ता रखने में असमर्थ है, तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से सरकारी अधिवक्ता की सहायता ले सकता है। यानी आर्थिक परेशानी किसी व्यक्ति को कानूनी मदद से वंचित नहीं कर सकती। शिविर के दौरान इंद्र उर्फ सलमान अंसारी और रैयाजुद्दीन खलीफा को विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत रिहा भी किया गया। बंदियों को स्वास्थ्य और खान-पान को लेकर भी जागरूक किया गया। अधिकारियों ने बंदियों से अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और खान-पान पर विशेष ध्यान देने की अपील की।

परिवार भी प्रभावित होता है

जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव निभा रंजना लकड़ा ने कहा कि प्राधिकार बंदियों के साथ-साथ उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिये भी लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब परिवार का मुखिया जेल चला जाता है तो पीछे रह गये बच्चों और परिजनों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और आर्थिक संकट से राहत दिलाने के लिये विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से हरसंभव प्रयास किया जाता है। जेल अधीक्षक कुमार मयंक भूषण ने बंदियों से कहा कि जेल से जुड़ी किसी भी समस्या को वे बेझिझक अधिकारियों के सामने रख सकते हैं। उन्होंने बताया कि बंदियों की समस्याओं और आवेदनों को आवश्यक कार्रवाई के लिये जिला विधिक सेवा प्राधिकार को भेजा जाता है। कार्यक्रम में व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मो. अब्दुल नसीर, सचिव निभा रंजना लकड़ा, जेल अधीक्षक कुमार मयंक भूषण, एलएडीसी के चीफ प्रविन्द्र साहू, सहायक सुधीर कुमार तिवारी, जेलर मो. मुर्कीम अंसारी सहित न्यायालय और जेल के कर्मी मौजूद रहे।

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