‘हिंदी केवल भाषा नहीं, भावनात्मक एकता की ताकत’
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और माल्यार्पण के साथ हुआ। मुख्य अतिथि उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया। राजभाषा विभाग के उप निदेशक रविशंकर मिश्रा ने कार्यक्रम का संचालन किया और स्वागत भाषण दिया। विशिष्ट अतिथि संजय कुमार भगत ने भी अपने विचार रखे। अपने संबोधन में उपायुक्त ने कहा कि हिंदी देश की एकता और अखंडता की मजबूत अभिव्यक्ति है। यह केवल एक-दूसरे तक बात पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने वाली भाषा भी है।उपायुक्त ने मातृभाषा में अध्ययन-पठन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा में सीखने से किशोरों और युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में मदद मिलती है। बदलते तकनीकी दौर और AI के बढ़ते प्रभाव के बीच मौलिक सोच और भाषा की समृद्धि को बनाये रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में हिंदी को केवल साहित्य और सरकारी कामकाज तक सीमित रखने के बजाय उसे विज्ञान, नवाचार, शोध और रोजगार से जोड़ने की जरूरत है।
कविताओं ने बांधा समां
कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प हिस्सा कवि सम्मेलन रहा। मंच पर एक के बाद एक कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया और हिंदी की संवेदनशीलता, विविधता और रचनात्मक शक्ति को सामने रखा। कवि सम्मेलन में डॉ. जंगबहादुर पांडेय, डॉ. राजश्री जयन्ती, डॉ. सुरिन्दर कौर ‘नीलम’, नसीर अफसर, नरेश कुमार बंका, शालिनी नायक, सदानन्द सिंह यादव, सूरज श्रीवास्तव, डॉ. रजनी शर्मा ‘चन्दा’, डॉ. विनोद सिंह गहरवार ने अपनी रचनाओं का भावपूर्ण पाठ किया। कवियों की प्रस्तुतियों ने सभागार में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को साहित्य की दुनिया से जोड़ा। कार्यक्रम में रांची के सदर SDO कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) धनंजय, अपर समाहर्ता रामनारायण सिंह, उप परिवहन आयुक्त सह सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार अजय कुमार रजक, उप निर्वाचन पदाधिकारी विवेक सुमन समेत आयुक्त कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल, रांची के आयुक्त के सचिव रविन्द्र कुमार गगराई के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।






