Chouparan(Krishna Paswan) : जिंदगी जब अचानक करवट बदल ले, तब इंसान या तो टूट जाता है या फिर संघर्ष को ही अपना हथियार बना लेता है। पूजा देवी ने दूसरा रास्ता चुना। मानसिक बीमारी से जूझ रहे पति, दो मासूम बच्चों और लगातार कठिन होते हालातों के बीच पूजा देवी की कहानी आज समाज के लिये हिम्मत, संवेदना और सामाजिक सरोकार की गहरी सीख बन गई है। पूजा देवी के पति राजेश शर्मा कभी परिवार के मजबूत स्तंभ थे। कारपेंटर का काम कर वे घर का खर्च चलाते थे। लेकिन मानसिक बीमारी ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। आज उनका इलाज रांची के कांके स्थित अस्पताल में लगातार चल रहा है।
गुमशुदगी, चिंता और अकेली जंग
इलाज के दौरान राजेश एक बार पूरे साल भर घर से गायब रहे। काफी मशक्कत के बाद वे वापस लौटे, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। दो महीने बाद वे फिर लापता हो गये। इस बार उनकी राह चौपारण प्रखंड के सियरकोणी स्थित बाबा होटल तक जा पहुंची, जहां वे करीब एक सप्ताह रहे। बाबा होटल के संचालक ने जो किया, वह समाज के लिये मिसाल बन गया। उन्होंने राजेश का पूरा ख्याल रखा, वहीं, विदा करते समय किराये के पैसे भी थमा दिये। यह छोटा सा काम, बड़ी इंसानियत की पहचान बन गया। इसी दौरान पत्रकार अरविंद कुमार सिंह और कृष्णा पासवान ने सोशल मीडिया के जरिये इस बिछड़े परिवार की कहानी साझा की। उनकी पहल रंग लाई और पति-पत्नी का पुनर्मिलन संभव हो सका। 12 साल के बेटा और 7 साल की बेटी को एक बार फिर पिता का साया नसीब हुआ। पूजा देवी रांची के चिरौंदी में रहकर पति का इलाज करवा रही हैं। बच्चों के भविष्य के लिये वे लोगों के घरों में काम कर रही हैं, लेकिन चेहरे पर थकान से ज्यादा हौसले की चमक दिखती है। वहीं, पत्रकारों का कहना है कि “मीडिया का काम सिर्फ खबर दिखाना नहीं, बल्कि जरूरत के वक्त समाज के कमजोर लोगों के साथ खड़ा होना भी है। अगर हमारी कोशिश से एक परिवार फिर जुड़ सका, तो यही हमारी सबसे बड़ी सफलता है।”




