MP : मध्य प्रदेश में प्याज नहीं बिकी, लेकिन किसानों का दर्द मंडियों में छलक पड़ा। मध्य प्रदेश की मंडियों में प्याज की कीमतें ऐसी धड़ाम गिरीं कि इटावा में खेतों की मेहनत केवल 1 रुपये किलो में लुट गई। इतनी कम कीमत कि किसान बोले, “डीजल, मजदूरी, ढुलाई का खर्च भी नहीं निकल रहा, बेचकर फायदा नहीं, नुकसान ही नुकसान।” किसान बोरियों की रस्सी तक जितनी कीमत न मिलने से आगबबूला हैं। कई किसानों ने गुस्से में सड़क पर बोरी–भर प्याज फेंककर विरोध जताया। एक किसान बोला, “लागत से कम दाम मिलने हैं तो फिर हम हल क्यों चलायें? प्याज नहीं, अब हमारा कलेजा टूट रहा है।” किसानों ने सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि प्याज निर्यात पर 25% शुल्क लगने से विदेशी बाजार लगभग बंद पड़ गया। मांग कम, सप्लाई बढ़ी, परिणाम मंडियों में दाम जमीन में धंस गये। किसानों का दर्द साफ है कि जब बाहर ही नहीं जा रही प्याज तो हम कहां ले जायें अपनी मेहनत?
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