Ranchi : झारखंड सरकार द्वारा पेसा कानून लागू किये जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। जयप्रकाश जनता दल के राष्ट्रीय सचिव पंकज मिश्र ने पेसा कानून को अधूरा और अस्पष्ट बताते हुये सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पंकज मिश्र ने कहा कि राज्य के 13 अनुसूचित जिलों में पेसा कानून के प्रभावी होने का सीधा अर्थ है वहां रहने वाले सभी नागरिकों, आदिवासी और मूलवासी के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना। लेकिन जिस जल्दबाजी में पेसा को लागू करने की घोषणा की गई है, उससे न तो आदिवासियों को वास्तविक लाभ मिल रहा है और न ही मूलवासियों के अधिकार सुरक्षित हो रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि पेसा कानून में ग्राम सभा और पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। इसी तरह दो हजार रुपये तक के दंड का प्रावधान तो रखा गया है, लेकिन यह दंड किस तरह के अपराधों पर लगाया जायेगा, इसका कहीं उल्लेख नहीं है। पंकज मिश्र ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और ग्राम सभा के बीच समन्वय कैसे होगा, इस पर भी कानून पूरी तरह मौन है। इससे भविष्य में टकराव और दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मूलवासी समाज को लेकर गहरी चिंता जताते हुये कहा कि पेसा कानून में मूलवासियों के हितों की रक्षा से जुड़ा कोई ठोस प्रावधान शामिल नहीं किया जाना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। यह स्थिति कानून की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। पंकज मिश्र ने सरकार से आग्रह किया कि पेसा कानून को व्यावहारिक, संतुलित और सभी समुदायों के हितों को समाहित करने वाला बनाया जाये, ताकि यह कानून सशक्तिकरण का माध्यम बने, न कि भ्रम और विवाद का कारण।




