भारत में सरोजनी नायडू के जन्म तिथि 13 फ़रवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। सरोजिनी नायडू भारत की पहली महिला राज्यपाल थीं और ‘भारत कोकिला’ के नाम से भी प्रसिद्ध थीं। सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था। भारत में महिलाओं के विकास के लिए सरोजनी नायडू द्वारा किए गए कार्यों को मान्यता देने हेतु उनके जन्मदिन को ‘राष्ट्रीय महिला दिवस’ के रूप में चयनित किया गया था।

सरोजिनी नायडू एक निडर नेता और महात्मा गांधी की अनुयायी थीं। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए भारत के आंदोलन में लगन से भाग लिया और यहां तक कि कई बार जेल भी गए। गांधी जी के ऐसे व्यक्तित्व से सरोजिनी नायडू बहुत प्रभावित हुईं और गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर ही वे देश के लिए समर्पित हो गईं। उन्होंने एक कुशल सेनापति के रूप में अपनी प्रतिभा का परिचय सत्याग्रह और संगठन में भी दिया। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल भी गयीं।
गांधीजी ने उनके भाषणों से प्रभावित होकर उन्हें ‘भारत कोकिला’ की उपाधि दी थी. लेकिन वो अपने पत्रों में उन्हें कभी-कभी ‘डियर बुलबुल’,’डियर मीराबाई’ तो यहां तक कि कभी मजाक में ‘अम्माजान’ और ‘मदर’ भी लिखते थे। मजाक के इसी अंदाज में सरोजिनी भी उन्हें कभी ‘जुलाहा’, ‘लिटिल मैन’ तो कभी ‘मिकी माउस’ संबोधित करती थीं। भारत का कोकिला 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद में कवियों और विद्वानों के बंगाली परिवार में पैदा हुआ थी । उनकी मां बारदा सुंदरी देवी चट्टोपाध्याय और उनके एक भाई हरिंद्रनाथ कवि थे।

भारत उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में चिह्नित करके सरोजिनी नायडू की विरासत का सम्मान और जश्न मनाता है। सरकारी विभाग इसके चारों ओर कार्यक्रम आयोजित करते हैं और उसके नेतृत्व को याद करते हैं।

स्वतंत्रता और शासन में उनकी भूमिका के अलावा, सरोजिनी नायडू एक कवियित्री थीं और उनकी कई कविताएँ और संग्रह उनके जीवनकाल में और उसके बाद भी प्रकाशित हुए। उनकी कुछ प्रसिद्ध रचनाएँ हैं, द सेप्ट्रेड फ़्लुट, सांग्स ऑफ़ इंडिया, इलाहाबाद: किताबीस्तान (1943),और द इंडियन वीवर्स (1971)।




