टायरों में नाइट्रोजन गैस भरवाना फायदे का सौदा है या फिजूल खर्च, जानें…

Date:

spot_img

Kohramlive : सर्दियों में सुबह-सुबह गाड़ी निकालते वक्त टायरों का प्रेशर कम मिलता है? अगर ऐसा हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ठंड बढ़ने पर टायरों के अंदर हवा का दबाव स्वाभाविक रूप से घट सकता है। ऐसे में कई वाहन चालक नाइट्रोजन गैस भरवाने के बारे में सोचते हैं। लेकिन क्या नाइट्रोजन वाकई साधारण हवा से बेहतर है या सही प्रेशर बनाये रखना ही सबसे जरूरी है? आइये, आसान भाषा में समझते हैं।

सर्दियों में टायर प्रेशर क्यों गिरता है?

तापमान घटने पर टायरों के अंदर मौजूद गैस का दबाव भी कम होता है। सामान्य तौर पर तापमान में हर 10 डिग्री सेल्सियस की गिरावट से टायर प्रेशर लगभग 1-2 PSI तक कम हो सकता है। वास्तविक बदलाव तापमान और टायर की स्थिति पर निर्भर करता है। कम प्रेशर में गाड़ी चलाने से टायर ज्यादा गर्म हो सकते हैं, उनकी घिसावट बढ़ सकती है और ईंधन की खपत पर भी असर पड़ सकता है। इसलिये सर्दियों में टायरों की नियमित जांच जरूरी है।

नाइट्रोजन गैस के क्या फायदे हैं?

नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल खासकर कुछ प्रीमियम कारों और मोटरस्पोर्ट्स में किया जाता है। इसके कुछ फायदे हैं:

  • नमी कम: टायरों में भरी नाइट्रोजन आमतौर पर अधिक शुष्क होती है, जिससे नमी से जुड़ी समस्याएं कम हो सकती हैं।
  • प्रेशर धीरे घट सकता है: नाइट्रोजन के अणुओं के गुणों के कारण कुछ परिस्थितियों में टायर से गैस का रिसाव अपेक्षाकृत धीमा हो सकता है।
  • टायर की देखभाल: सही प्रेशर बनाए रखने में मदद मिलने से टायरों की घिसावट और ड्राइविंग से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि नाइट्रोजन भी ठंड में दबाव खोती है। यह साधारण हवा के मुकाबले तापमान से बहुत कम प्रभावित नहीं होती। दोनों गैसों के प्रेशर पर तापमान का असर पड़ता है।

क्या नाइट्रोजन से माइलेज बढ़ता है?

सही टायर प्रेशर से गाड़ी की रोलिंग रेजिस्टेंस कम रखने में मदद मिलती है, जिससे माइलेज बेहतर रह सकता है। वहीं कम प्रेशर होने पर ईंधन की खपत बढ़ सकती है। लेकिन नाइट्रोजन भरवाने मात्र से माइलेज में बड़ी बढ़ोतरी की गारंटी नहीं है। यदि साधारण हवा से टायर का प्रेशर सही रखा जा रहा है, तो सामान्य इस्तेमाल में नाइट्रोजन का अतिरिक्त फायदा सीमित हो सकता है। इसी तरह, टायरों में सही प्रेशर और अच्छी स्थिति सड़क पर पकड़ बनाये रखने में मदद करती है। सुरक्षित ब्रेकिंग के लिये टायरों की हालत, सड़क की सतह और गाड़ी की गति भी अहम हैं।

नाइट्रोजन भरवायें या साधारण हवा?

शहर में रोजाना गाड़ी चलाते हैं: साधारण हवा पर्याप्त है, बशर्ते आप नियमित रूप से प्रेशर जांचते रहें।

हाईवे पर लंबी दूरी तय करते हैं: नाइट्रोजन एक विकल्प हो सकती है, लेकिन सुरक्षित सफर के लिये सही प्रेशर और टायरों की जांच ज्यादा महत्वपूर्ण है।

पहले से टायरों में नाइट्रोजन है: जरूरत पड़ने पर साधारण हवा मिलाना भी सुरक्षित है। प्रेशर कम होने पर केवल गैस के प्रकार के कारण हवा भरवाने में देरी न करें।

सर्दियों में टायरों की देखभाल के 5 जरूरी नियम

  1. टायरों का प्रेशर कम से कम महीने में एक बार और लंबी यात्रा से पहले जांचें।
  2. प्रेशर हमेशा ठंडे टायरों में जांचें।
  3. अपनी गाड़ी के निर्माता द्वारा बताये गये प्रेशर का पालन करें। यह जानकारी आमतौर पर ड्राइवर के दरवाजे के पास लगे स्टिकर या मालिक की पुस्तिका में मिलती है।
  4. टायर में कट, दरार, असामान्य घिसावट या बार-बार हवा कम होने की समस्या दिखे, तो जांच कराएं।
  5. टायर के साइडवॉल पर लिखे अधिकतम प्रेशर को सामान्य उपयोग का अनुशंसित प्रेशर न समझें।

निष्कर्ष: सर्दियों में नाइट्रोजन भरवाना अनिवार्य नहीं है। साधारण हवा से भी सुरक्षित ड्राइविंग की जा सकती है। असली बात है—टायरों का प्रेशर सही रखना, नियमित जांच करना और खराब टायरों को समय पर बदलना।

इसे भी पढ़ें :

कैसा रहेगा आपका सप्ताह, पढ़ें उपाय….

Kohramlive : अक्टूबर का आखिरी सप्ताह और नवंबर की...

एशियन पैरा गेम्स का समापन: 114 मेडल झटक भारत ने रचा इतिहास…

Kohramlive : जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा...

RIMS में ब्रेन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन…

Ranchi : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची के न्यूरोसर्जरी...

तीन दशक पुराने म’र्डर केस में उम्रकैद की सजा पाये कैदी बरी…

Hazaribagh : करीब तीन दशक तक चले एक पुराने...

Advertisement

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

कैसा रहेगा आपका सप्ताह, पढ़ें उपाय….

Kohramlive : अक्टूबर का आखिरी सप्ताह और नवंबर की...

एशियन पैरा गेम्स का समापन: 114 मेडल झटक भारत ने रचा इतिहास…

Kohramlive : जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा...

RIMS में ब्रेन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन…

Ranchi : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची के न्यूरोसर्जरी...

तीन दशक पुराने म’र्डर केस में उम्रकैद की सजा पाये कैदी बरी…

Hazaribagh : करीब तीन दशक तक चले एक पुराने...