Kohramlive : मुसीबत की घड़ी में रिश्तों की असली पहचान होती है। जब भोटेकोशी की तेज धार ने नेपाल में तबाही मचाई, तो कई परिवारों के सामने जिंदगी बचाने की जद्दोजहद थी। ऐसे वक्त में पड़ोसी भारत मदद के लिये आगे आया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 26 अगस्त को भोटेकोशी में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत, चीन और अमेरिका से मिली सहायता के लिये आभार जताया है। उन्होंने कहा कि मुश्किल वक्त में मिली इस मदद ने बचाव और राहत अभियानों में अहम भूमिका निभाई। आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 11,993 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। बालेन शाह के मुताबिक, कम से कम 3,916 लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। ऐसे में राहत एजेंसियों और सुरक्षा बलों के सामने लापता लोगों तक पहुंचने की बड़ी चुनौती बनी हुई है। बालेन शाह ने बताया कि बाढ़ के अगले दिन मंत्रियों का एक दल प्रभावित इलाकों में पहुंचा और हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में नेपाल को भारत, चीन, अमेरिका और दूसरे देशों से सहायता मिली। इसके साथ ही कई बैंकों ने भी राहत कार्यों के लिये मदद उपलब्ध कराई। नेपाल और भारत के रिश्ते सिर्फ नक्शे पर खिंची सीमा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ते हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, बालेन शाह बोले, ‘शुक्रिया पड़ोसी’
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