घर में चिल्लाने से बचें
बच्चों के सामने तेज आवाज में बात करना या छोटी-छोटी बातों पर चिल्लाना उनके व्यवहार पर असर डाल सकता है। अगर घर में बातचीत का तरीका ही तेज और गुस्से वाला होगा, तो बच्चा भी धीरे-धीरे उसी अंदाज को अपनाने लगता है। बच्चे को शांत और प्यार से बात करना सिखाना है तो पहले माता-पिता को अपनी आवाज और गुस्से पर नियंत्रण रखना होगा। घर का शांत माहौल बच्चे के आत्मविश्वास के लिये भी बेहतर होता है।
सिर्फ रोकें नहीं, जिम्मेदारी भी समझायें
बच्चा घर में दौड़ रहा है तो सिर्फ यह कहने के बजाय कि ‘दौड़ो मत’, उसे यह समझाना ज्यादा असरदार हो सकता है कि घर के अंदर धीरे चलना क्यों जरूरी है। उसे बतायें कि तेज दौड़ने से चोट लग सकती है या किसी सामान को नुकसान पहुंच सकता है। इससे बच्चा केवल आदेश मानना नहीं, बल्कि उसके पीछे की वजह समझना भी सीखता है।
अपनी जुबान पर रखें लगाम
बच्चे अपने आसपास सुनी हुई भाषा को बहुत जल्दी पकड़ लेते हैं। घर में गाली-गलौज या अपशब्दों का इस्तेमाल होता है तो बच्चा भी उन्हें दोहराना शुरू कर सकता है। बच्चों को अच्छी भाषा सिखाने का सबसे आसान तरीका है कि माता-पिता खुद अपनी भाषा को मर्यादित रखें। क्योंकि बच्चे को ‘ऐसा मत बोलो’ कहना आसान है, लेकिन उसे सही भाषा का उदाहरण देना ज्यादा जरूरी है।
बच्चों के सामने नशे से रहें दूर
धूम्रपान या शराब का सेवन बच्चों के सामने करना भी उनकी सोच और आदतों पर असर डाल सकता है। बच्चे जब अपने माता-पिता को नियमित रूप से ऐसी चीजों का इस्तेमाल करते देखते हैं, तो उनके मन में यह व्यवहार सामान्य लग सकता है। बच्चों को इन आदतों से दूर रखना चाहते हैं तो सबसे बेहतर संदेश यही है कि माता-पिता खुद भी इनसे दूरी बनायें और बच्चों के सामने इनके सेवन से बचें।
सोने-जागने का बनायें सही रूटीन
बच्चे दिनचर्या भी देखकर सीखते हैं। अगर घर में माता-पिता नियमित समय पर सोते और सुबह समय पर उठते हैं, तो बच्चे के लिये भी ऐसी दिनचर्या अपनाना आसान हो जाता है। समय पर सोना, सुबह उठना और दिन की शुरुआत तय रूटीन से करना बच्चों में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में मदद कर सकता है।






