Kohramlive : प्रकृति की किताब में ऐसे कितने ही पन्ने हैं, जिन्हें पढ़कर इंसान कुछ पल के लिये ठहर जाता है। धरती पर जीवन जितना खूबसूरत है, उतना ही रहस्यों से भरा भी। समुद्र की गहराइयों में तो प्रकृति के ऐसे-ऐसे राज छिपे हैं, जिनके बारे में जानकर पहली बार यकीन करना मुश्किल हो जाता है। इन्हीं रहस्यों में एक है, कुछ जीवों का अपने जीवनकाल में लिंग बदल लेना। जी हां, कुछ समुद्री जीव ऐसे होते हैं जो अपने जीवन की शुरुआत नर के रूप में करते हैं और बाद में मादा बन सकते हैं। वहीं कुछ प्रजातियों में इसका उल्टा भी होता है—मादा से नर। यह कोई बीमारी या असामान्य घटना नहीं, बल्कि कुछ प्रजातियों के लिये प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है।
आखिर कैसे बदल जाता है लिंग?
वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को Sequential Hermaphroditism कहते हैं। इसमें कोई जीव अपने जीवन के एक चरण में एक लिंग के रूप में प्रजनन करने में सक्षम होता है और बाद में जैविक बदलावों के जरिए दूसरे लिंग में बदल सकता है। यह बदलाव कोई जादुई घटना नहीं है और न ही रातों-रात शरीर बदल जाता है। इसके पीछे हार्मोनल, शारीरिक और प्रजनन तंत्र से जुड़े जटिल जैविक बदलाव होते हैं। कुछ प्रजातियों में सामाजिक परिस्थितियां भी इस बदलाव को प्रभावित कर सकती हैं। यानी प्रकृति ने इन जीवों को परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की एक अनोखी क्षमता दी है। इसका सबसे चर्चित उदाहरण है क्लाउनफिश। क्लाउनफिश के समूह में आमतौर पर एक प्रजनन करने वाली प्रमुख मादा और उसके साथ कई नर होते हैं। अब कहानी में आता है सबसे बड़ा मोड़, अगर समूह की प्रमुख मादा की मौत हो जाये तो समूह की सामाजिक व्यवस्था बदल जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रजननक्षम नर मादा में बदल सकता है। इसके बाद समूह का अगला प्रमुख नर प्रजनन करने वाले नर की भूमिका निभाता है। इस तरह समूह की प्रजनन व्यवस्था चलती रहती है और उसे बाहर से नई मादा मिलने का इंतजार नहीं करना पड़ता। यानी समुद्र की दुनिया में भी परिवार की व्यवस्था परिस्थितियों के हिसाब से बदल सकती है।
सिर्फ क्लाउनफिश ही नहीं बदलते लिंग
प्रकृति का यह रहस्य सिर्फ क्लाउनफिश तक सीमित नहीं है। कुछ अन्य समुद्री मछलियों और जीवों में भी जीवन के दौरान लिंग परिवर्तन देखा गया है। अलग-अलग प्रजातियों में इसके कारण भी अलग हो सकते हैं। कहीं सामाजिक स्थिति, कहीं साथी की उपलब्धता, तो कहीं समूह की संरचना या उम्र इस प्रक्रिया से जुड़ी हो सकती है। यानी समुद्री दुनिया में प्रजनन की रणनीति हर प्रजाति के लिये एक जैसी नहीं होती। कुछ प्रजातियों में नर से मादा बनने की प्रक्रिया देखी जाती है, जबकि कुछ में मादा से नर बनने का बदलाव होता है। घोंघे, रैस मछलियां, पैरेटफिश और गोबी मछलियों की कुछ प्रजातियां इस तरह के लिंग परिवर्तन के लिये जानी जाती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हर प्रजाति में यह प्रक्रिया अपने अलग जैविक नियमों के तहत होती है।
आखिर प्रकृति ने ऐसी व्यवस्था क्यों बनाई?
इसका एक बड़ा कारण है, प्रजनन की संभावना को बनाये रखना। समुद्र की दुनिया में साथी का मिलना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे वातावरण में अगर किसी समूह में एक महत्वपूर्ण प्रजनन साथी खत्म हो जाए तो पूरी प्रजाति की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ जीवों में लिंग बदलने की क्षमता ऐसी परिस्थितियों में प्रजनन व्यवस्था को बनाये रखने में मदद करती है। प्रकृति का संदेश मानो साफ है, बदलते माहौल में जो खुद को ढाल लेता है, वही जीवन की कहानी को आगे बढ़ाता है।






