UP : गोरखपुर की गलियों में पिछले पांच महीनों से एक ऐसा खेल चल रहा था, जिसमें चमक बहुत थी, पर सच की रोशनी बिल्कुल नहीं। एक किराये के मकान से उठता था रुतबे का धुआं, नीली बत्ती की झिलमिल, लाइफस्टाइल में एलीटनेस का तड़का और दावा कि “मैं 2022 बैच का IAS हूं।” लेकिन सच सामने आया तो परत दर परत खुलता गया एक शातिर दिमाग का साम्राज्य। सीतामढ़ी का रहने वाला ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार, कभी एक कोचिंग में गणित पढ़ाता था। MAC, PHD की राह पर चलने वाला ये युवक 2023 में एडमिशन के नाम पर दो लाख लेने के आरोप में कोचिंग से निकाला गया। पकड़े जाने के बाद उसने पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले राज खोले। पुलिस जांच से खुलासा हुआ कि 10–12 गनर, हर एक की तनख्वाह 30,000 रुपये, एक मैनेजर, वेतन 60,000 रुपये, स्कॉर्पियो और अर्टिगा, दोनों की 30,000 रुपये EMI, होटल में 30,000 रुपये किराया और खुद को सरकारी अधिकारी दिखाने के लिये निजी गाड़ियों पर ‘सरकारी कार्य’ लिखवाना उसकी फितरत हो गई। जब वह किसी स्कूल, होटल या कार्यक्रम में पहुंचता तो उसके आगे-पीछे गनरों का काफिला चलता। लोग सोचते, “अरे ये तो बड़ा अधिकारी है।” इसी भरोसे में उसकी ठगी का नेटवर्क और गहरा होता गया। उसकी निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी खलनायक जैसी निकली। पुलिस के अनुसार, उसकी एक पत्नी और दो बच्चे, चार प्रेमिकायें, तीन गोरखपुर की और एक सीतामढ़ी की और इनमें तीन गर्भवती है। महंगे मोबाइल, ज्वैलरी, कैश, ललित इन सब पर पानी की तरह पैसे बहा रहा था। हर रिश्ता, एक नया मुखौटा। गुजरे पांच महीनों से वह परिवार और साले के साथ यही मकान ठिकाना बनाकर ठगी का नेटवर्क चला रहा था, ऑनलाइन भी, ऑफलाइन भी। वह कई स्कूलों में ‘निरीक्षण’ के नाम पर पहुंच चुका था। बोर्ड परीक्षाओं के दौरान भी दो गाड़ियां और गनर लेकर पहुंच गया था।
AI के सहारे रचा जाल, सबकुछ फर्जी
ललित का असली हथियार था AI तकनीक। मंत्रालय के नोट, नियुक्ति आदेश, बैठक के लेटर, अधिकारियों की असली तस्वीरें हटाकर अपनी फोटो लगा देना, इसके जरिये वह किसी को भी भरोसे में ले लेता था। उसके पास से तो देवरिया DM की मीटिंग की फर्जी फोटो भी बरामद हुई। SSP के निर्देश पर अब पूरे गिरोह की जांच हो रही है। यह पता लगाया जा रहा है, फर्जी दस्तावेज कौन बनाता था? अब तक कितने लोग फंसे? किन-किन जगहों पर उसने निरीक्षण या वसूली की?








