बाढ़ ने छीनी रफ्तार, मटन 1700 रुपये किलो और अंडा 25 रुपये पीस…

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Kohramlive : पहाड़ों से उतरती बाढ़ ने नेपाल की जमीन पर ऐसा जख्म छोड़ा है, जिसकी टीस अब घरों की रसोई तक पहुंच गई है। 26 अगस्त को पाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई। अब तक 1,388 लोगों की मौत हो चुकी है। सड़कें टूटीं, पुल बह गये और रास्ते बंद हुये तो सामान की आवाजाही पर ब्रेक लग गया। नतीजा यह हुआ कि जरूरी सामान महंगा होता चला गया। काठमांडू घाटी के बाजारों में चावल, तेल, चीनी, दाल, सब्जियों से लेकर मटन और अंडे तक की कीमतें बढ़ गई हैं। आम आदमी के सामने अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बाजार में क्या महंगा हुआ, बल्कि यह है कि रसोई में क्या पकाया जाये और क्या छोड़ दिया जाये। बाढ़ के बाद पृथ्वी राजमार्ग और भोटेकोशी इलाके में सड़क संपर्क टूटने से काठमांडू की आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सबसे बड़ा असर रसोई गैस पर पड़ा है। LPG सिलेंडर के लिये लोगों को घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। इंतजार लंबा है और सिलेंडर मिलने की गारंटी फिर भी नहीं। नेपाल में सितंबर-अक्टूबर का समय त्योहारों की रौनक से भरा रहता है। तीज, दशैं और तिहार जैसे बड़े पर्व इसी दौरान आते हैं। लेकिन इस बार बाजार की गर्मी ने त्योहारों की खुशियों पर भी असर डाला है। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में जरूरी सामान की पूरी तरह कमी नहीं है। उनका आरोप है कि आपदा और त्योहारों की बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कुछ थोक व्यापारी और बिचौलिये कीमतें बढ़ा रहे हैं।

चीनी 140, मटन 1,700 रुपये किलो

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की राजधानी और आसपास के बाजारों में महंगाई की तस्वीर कुछ ऐसी है—

  • चावल: जीरा मसिनो चावल का 20 किलो बोरा 500 रुपये महंगा होकर 2,700 नेपाली रुपये।
  • सूरजमुखी तेल: 245 से बढ़कर 295-300 रुपये लीटर।
  • सरसों तेल: 410 से बढ़कर 460 रुपये लीटर।
  • चीनी: 100 से बढ़कर 140 रुपये किलो।
  • काली दाल: 180 से बढ़कर 200 रुपये किलो।
  • टमाटर: करीब 120 रुपये किलो।
  • करेला: करीब 100 रुपये किलो।
  • फुजी सेब: करीब 450 रुपये किलो।
  • मटन: 1,300 से बढ़कर सीधे 1,700 रुपये किलो।
  • अंडा: 22 से बढ़कर 25 रुपये प्रति पीस।

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