Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा अस्पताल का सभागार आज संवेदना, सम्मान और सामाजिक जागरूकता का केंद्र बन गया, DLSA (जिला विधिक सेवा प्राधिकार) ने “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007” पर जागरूकता सेमिनार आयोजित किया। नालसा–झालसा के निर्देश पर तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष DLSA मनोज प्रसाद और सचिव निभा रंजन लकड़ा के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम उस अनदेखे कर्ज की याद दिलाता रहा माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा का कर्ज।
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य था, समाज के हर वर्ग, खासकर युवा पीढ़ी को यह बताना कि अगर माता-पिता अपनी आय से जीवनयापन करने में असमर्थ हों, तो वे अपने बच्चों से भरण-पोषण का कानूनी हक मांग सकते हैं। LADC प्रवीन्द कुमार साहु ने अधिनियम की मुख्य धाराओं पर बड़ी स्पष्टता से प्रकाश डाला धारा 5 भरण-पोषण के लिये आवेदन प्रक्रिया ट्रिब्यूनल की स्थापना व अधिकार, वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा को अपराध मानना, ट्रिब्यूनल द्वारा अधिकतम ₹10,000 महीना भरण-पोषण तय किया जा सकता है, उनके संबोधन ने उपस्थित लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कानून से पहले इंसानियत का फर्ज़ निभाना क्यों ज़रूरी है। PLV रविंद्र कुमार पाठक ने दो टूक कहा “वरिष्ठ नागरिकों को न्याय दिलाने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में DLSA हमेशा उनके साथ खड़ा है।” उन्होंने यह भी बताया कि वरिष्ठ जनों को मुफ्त कानूनी सहायता, वृद्धाश्रम/केयर होम की व्यवस्था, स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के उपाय सब अधिनियम के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।




