Kohramlive : डायबिटीज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। इसे लेकर सबसे आम गलतफहमी यह है कि ज्यादा मिठाई या चीनी खाने से ही डायबिटीज होती है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें वजन, शारीरिक गतिविधि, खान-पान, आनुवंशिकता और नींद-तनाव जैसी जीवनशैली से जुड़ी आदतें शामिल हैं।
डायबिटीज का खतरा किन कारणों से बढ़ सकता है?
बढ़ता वजन: खासकर पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस का जोखिम बढ़ा सकती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज की संभावना बढ़ती है।
कम शारीरिक गतिविधि: लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना ब्लड शुगर नियंत्रण पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। रोजाना पैदल चलना, साइकिलिंग, योग या अन्य शारीरिक गतिविधि मददगार हो सकती है।
असंतुलित खान-पान: सिर्फ मिठाई ही नहीं, बल्कि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अत्यधिक कैलोरी, प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन भी जोखिम बढ़ा सकता है। सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन को प्राथमिकता देना बेहतर है।
आनुवंशिक कारण: माता-पिता या करीबी परिवार में टाइप-2 डायबिटीज होने पर जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, पारिवारिक इतिहास का मतलब यह नहीं कि डायबिटीज होना तय है।
तनाव और खराब नींद: लंबे समय तक तनाव और अपर्याप्त नींद वजन, मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं में योगदान दे सकते हैं।
सिर्फ चीनी छोड़ना क्यों काफी नहीं?
चीनी और मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना अच्छी आदत है, लेकिन डायबिटीज से बचाव के लिये केवल मीठा छोड़ना पर्याप्त नहीं है। वजन को स्वस्थ रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण है। अगर किसी व्यक्ति में डायबिटीज का पारिवारिक इतिहास, अधिक वजन या अन्य जोखिम कारक हैं, तो डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
नोट: यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। डायबिटीज की रोकथाम, जांच या इलाज के लिये व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।




