Ranchi : झारखंड की राजधानी इन दिनों सिर्फ बारिश की बूंदों से नहीं, बल्कि युवाओं के उबलते आक्रोश से भी भीग रही है। मोराबादी से लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या मेहनत से ज्यादा ताकतवर हो गई है भर्ती व्यवस्था की गड़बड़ी? इसी सवाल के बीच एक नाम लगातार सुर्खियों में है, देवेंद्र नाथ महतो। छात्र नेता, आंदोलनकारी और अब हजारों प्रतियोगी छात्रों की उम्मीद का चेहरा। रांची के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के रहने वाले देवेंद्र नाथ महतो एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। पिता बिशम्भर महतो सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (SPMU) से स्नातक, फिर कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर और बीएड की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों से ही छात्र हितों के सवालों पर सक्रिय रहे देवेंद्र ने समय के साथ खुद को छात्र राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा बना लिया।
छात्र नेता से आंदोलन के चेहरे तक
साल 2015 में नियोजन नीति के खिलाफ आंदोलन हो या 2016 में छात्रवृत्ति कटौती का विरोध, देवेंद्र लगातार सड़कों पर दिखे। 2019 में JPSC भर्ती में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुये आंदोलन के बाद उनकी पहचान पूरे राज्य में मजबूत हुई। उनके समर्थकों का दावा है कि कई बड़े छात्र आंदोलनों के बाद भर्ती परीक्षाओं में कार्रवाई और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने जैसे फैसले भी हुये।
भूख हड़ताल बनी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत
JPSC की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद देवेंद्र ने 25 जुलाई से धरना शुरू किया और 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गये। चार दिन तक अन्न का एक दाना तक नहीं लिया। बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से फोन पर बातचीत हुई। उनके आग्रह और आंदोलन को समर्थन देने के आश्वासन के बाद देवेंद्र ने केवल पानी और नमक लेकर अनशन समाप्त किया। लेकिन उनका संदेश साफ था, “अनशन खत्म हुआ है, आंदोलन नहीं। जब तक झारखंड के छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, लड़ाई जारी रहेगी।”
आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ?
JPSC ने 103 पदों के लिये हुई प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी किया और 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिये सफल घोषित किया। फिर, यहीं से सवाल उठने लगे। अभ्यर्थियों ने श्रेणीवार कट-ऑफ सार्वजनिक करने की मांग की। मेरिट सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठे। सोशल मीडिया पर कुछ कथित OMR शीट वायरल हुईं, जिनमें परीक्षा परिणाम को लेकर दावे किये गये। हालांकि, इन वायरल दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं दावों ने छात्रों के विरोध को तेज कर दिया।
सड़क पर क्यों उतरे छात्र?
छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में सामने आती कथित गड़बड़ियों के खिलाफ उनका आक्रोश है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द हो। निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाये। JPSC और JSSC की भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार हो। TDPL के माध्यम से हुई परीक्षाओं की समीक्षा हो। पूरे मामले की CBI जांच कराई जाये। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय की जाये।
सरकार ने क्या कहा?
छात्रों के बढ़ते आंदोलन के बीच सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने कहा है कि छात्रों की मांगों पर विचार के लिये जल्द उच्चस्तरीय समिति बनाई जायेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी भरोसा दिलाया कि सरकार के दरवाजे छात्रों के लिये खुले हैं और उनकी बात गंभीरता से सुनी जायेगी। हालांकि, समिति की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अब तक जांच में क्या हुआ?
मामले की जांच CID को सौंपी जा चुकी है। विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। जांच के दौरान पूर्व JPSC उप परीक्षा नियंत्रक, TDPL के निदेशक समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। सफल अभ्यर्थियों से OMR शीट की कार्बन कॉपी भी मांगी गई है। इसी बीच JPSC ने मुख्य परीक्षा सहित नौ भर्ती परीक्षाएं अगली सूचना तक स्थगित कर दीं। तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उधर, झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। आयोग से जवाब तलब किया गया है और अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।















