Kohramlive : बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग के सात बड़े नेताओं को मौत की सजा सुनाई गई है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-2 ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। मामला 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। साल 2024 में बांग्लादेश में छात्रों ने बड़ा आंदोलन किया था। धीरे-धीरे यह आंदोलन हिंसक हो गया। 5 अगस्त 2024 को भारी विरोध के बीच शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा और वह बांग्लादेश से भारत आ गईं। इल्जाम है कि आंदोलन को दबाने के लिए अवामी लीग के इन नेताओं ने हिंसा को बढ़ावा दिया और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया।
किन नेताओं को मिली सजा?
मौत की सजा पाने वालों में अवामी लीग के महासचिव और पूर्व मंत्री ओबैदुल कादेर, एएफएम बहाउद्दीन नसीम और पूर्व राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात शामिल हैं। इनके अलावा पार्टी से जुड़े शेख फजले शम्स परश, मैनुल हुसैन खान निखिल, साद्दाम हुसैन और शेख वली आसिफ एनान को भी फांसी की सजा सुनाई गई है। यह पहली बार नहीं है जब शेख हसीना और उनकी पार्टी के बड़े नेताओं पर इतनी सख्त कार्रवाई हुई है। नवंबर 2025 में शेख हसीना को भी मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई गई थी। हसीना फिलहाल भारत में हैं। उन्होंने इस फैसले और मुकदमे की प्रक्रिया पर सवाल उठाये थे। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी हसीना के मुकदमे की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई थी।






