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Chaitra Navratri 2021: भारत ही नहीं दुनिया के इन चार मुल्कों में भी है शक्तिपीठ,जहां दर्शन के लिए आते हैं श्रद्धालु

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नई दिल्ली : भारत की संस्कृति पूरे विश्व में सबसे पुरातन है। जिसका दायरा हिमालय के बर्फ से लेकर दक्षिण के श्रीलंका तक, पश्चिम के रेगिस्तान से पूर्व के नम डेल्टा तक फैला है। भारत की पहचान सबसे पुरानी संस्कृति और सभ्यता के तौर पर होता है। फिर चाहे बात आप यहां की विविधता की कीजिए या फिर इसके सांस्कृतिक इतिहास की। भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जो पूरे विश्व में मशहूर हैं। इसके साथ ही भारत में देवी के कई मशहूर शक्तिपीठ हैं। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि भारत के अलावा दुनिया के अन्य चार देशों में भी देवी का शक्तिपीठ है।

श्रीलंका में इंद्राक्षी या लंका शक्तिपीठ

श्रीलंका के जाफना के नल्लूर में स्थित इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहां देवी सती की पायल गिरी थी। यहां की शक्ति को इन्द्राक्षी कहा जाता है। इसी कारण इस शक्तिपीठ को इन्द्राक्षी शक्तिपीठ भी कहते हैं। मान्यता ये भी है कि भगवान राम और देवराज इंद्र ने भी यहां पर देवी की पूजा की थी। भगवान राम से युद्ध कर रहे रावण ने भी इस मंदिर में शक्ति पूजा की थी।

बलूचिस्तान का हिंगलाज मंदिर

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित यह पवित्र मंदिर हिंगलाज माता का मंदिर के तौर पर जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भगवान शिव माता सती की लाश अपने गोद में लिए थे, उस समय विष्णु भगवान ने सती माता का सिर काटने के लिए चक्र फेंका था। उस चक्र ने सीधे जाकर सती माता का सिर काट दिया। कटने के बाद माता सती का सिर सीधे आकर पृथ्वी पर गिरा। कहा जाता है कि पृथ्वी पर माता का सिर इसी जगह पर गिरा था। बाद में इसे हिंगलाज माता के मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।

तिब्बत का मानस शक्तिपीठ

मान्यता ये है कि इस जगह पर माता सती कि बाईं हथेली गिरी थी। मानसरोवर के तट पर बने इस शक्तिपीठ को काफी प्रभावशाली माना जाता है। इस मंदिर में न केवल नवरात्र, बल्कि सालोभर श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। बता दें कि तिब्बती धर्मग्रंथ ‘कंगरी करछक’ में मानसरोवर की देवी ‘दोर्जे फांग्मो’ का यहां निवास कहा गया है।

नेपाल में दो शक्तिपीठ

नेपाल में गंडकी शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि यहां पर मां सती का कपोल गिरा। इसके अलावा एक और शक्तिपीठ शुपतिनाथ मंदिर के पास बागमती नदी के तट पर है। इसे गुजयेश्वरी मंदिर पीठ के तौर पर जाना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती के दोनों घुटने गिरे थे। यहां की शक्ति को महाशिरा कहा जाता है।

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