Ranchi : कोख में पल रही जिंदगी का लिंग जानना और उसके आधार पर जन्म से पहले ही उसे खत्म कर देना, यह सिर्फ एक अपराध नहीं, समाज के माथे पर लगा ऐसा दाग है, जिसे मिटाने के लिये अब झारखंड में कार्रवाई और तेज होगी। कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच पर रोक लगाने के लिये स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। गुरुवार को नामकुम स्थित लोक स्वास्थ्य संस्थान में PCPNDT एक्ट को लेकर राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जिलों के अधिकारी, सिविल सर्जन, महिला पुलिस अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी शामिल हुये। कार्यशाला में अधिकारियों को PCPNDT एक्ट के तहत जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इस दौरान अल्ट्रासाउंड मशीनों की निगरानी, रिकॉर्ड की जांच, क्लीनिक सील करने और कानूनी कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने भी अवैध लिंग जांच पर रोक के लिये चलाये जा रहे अभियान और डिकॉय ऑपरेशन की जानकारी साझा की। बेटी के जन्म से पहले ही उसकी ‘पहचान’ मिटाने वालों पर अब खास नजर रहेगी। सरकार की सख्ती, नियमित निगरानी और आम लोगों की सजगता साथ आये तो शायद वह दिन दूर नहीं, जब किसी मां को अपनी कोख में पल रही बेटी के लिये डरना नहीं पड़ेगा। क्योंकि बेटी को जन्म लेने का हक है और इस हक की हिफाजत कानून भी करेगा और समाज भी।
‘लिंग बताना गंभीर अपराध, तुरंत होगी कार्रवाई’
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिये अल्ट्रासाउंड सेंटरों की नियमित जांच और PCPNDT Act का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रूण का लिंग बताना गंभीर अपराध है। अगर कोई डॉक्टर, क्लीनिक या संस्थान अवैध लिंग जांच में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जायेगी। यानी अब अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर सिर्फ मशीन नहीं, नियम-कायदे और रिकॉर्ड भी जांचे जायेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे बड़े शहरों में अल्ट्रासाउंड सेंटरों की विशेष निगरानी का निर्देश दिया है। इसके साथ ही फर्जी डॉक्टरों और बिना लाइसेंस संचालित हो रहे क्लीनिकों की भी जांच की जायेगी। सरकार की कोशिश है कि कानून की आड़ में कहीं ऐसा खेल न चलता रहे, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल जिंदगी बचाने के बजाय लिंग पहचानने और भ्रूण हत्या के लिये किया जाये।
अब मुखबिर देगा खबर, तो मिलेगा ₹1 लाख
अवैध लिंग जांच के नेटवर्क तक पहुंचने के लिये स्वास्थ्य विभाग ने मुखबिर और डिकॉय योजना शुरू की है। अगर किसी व्यक्ति की सूचना के आधार पर अवैध लिंग जांच के खिलाफ कार्रवाई होती है तो कुल 1 लाख रुपये तक का ईनाम दिया जायेगा। इनाम की रकम इस तरह होगी, जैसे, मुख्य मुखबिर: ₹40,000, डिकॉय ऑपरेशन में सहयोग करने वाली गर्भवती महिला: ₹40,000, सहयोगी: ₹20,000। यानी अवैध लिंग जांच का खेल सामने लाने में मदद करने वालों को सरकार आर्थिक प्रोत्साहन भी देगी।
104 पर करें शिकायत, पहचान रहेगी गुप्त
अगर आपको कहीं अवैध लिंग जांच की जानकारी मिलती है तो 104 हेल्पलाइन पर शिकायत की जा सकती है। खास बात यह है कि सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जायेगी। स्वास्थ्य विभाग का संदेश साफ है कि अगर कहीं भ्रूण का लिंग बताने का खेल चल रहा है तो चुप रहने के बजाय इसकी जानकारी दें।




